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shabe qadr ki dua

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क्या है शब-ए-क़द्र 2022: शब-ए-क़द्र, जिसे लैलतुल क़द्र के नाम से भी जाना जाता है, शब का मतलब है रात,  इस्लामी कैलेंडर में पवित्र  (पाक) रातों में से एक रात है।  यह हर साल रमजान  महीने की अंतिम 5 विषम (odd) रातों में मनाया जाता है, जो इस्लामी कैलेंडर में नौवां महीना है। जैसे के आप रमजान के आखिरी 10 दिन में 21, 23, 25, 27 और 29 वे रोज़े में मनाई जाती है.



मुसलमानों का मानना ​​​​है कि इन रातों में वे जो कुछ भी चाहते हैं वह उनकी प्रार्थना (दुआ) के माध्यम से प्रदान किया जाता है।



पवित्र क़ुरआन में लिखा है कि शब-ए-क़द्र की रातों की नमाज़ हज़ार महीनों से कहीं बेहतर (अफज़ल ) है। इसलिए दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इन रातों को बड़े धार्मिक उत्साह के साथ मनाते है। इन शुभ रातों के दौरान, मुसलमान पूरी रात जागते रहते हैं, नमाज़ पढ़ते है, प्रार्थना करते हैं, कुरान पढ़ते हैं, और अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं।
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शब-ए-क़द्र उस रात को दर्शाता है जब पैगंबर मुहम्मद को पवित्र कुरान की पहली आयतें बताई गई थीं। और ऐसा माना जाता है कि इन रातों के दौरान अल्लाह की कृपा और कृपा प्रचुर मात्रा में होती है। इसके अलावा, यह माना जाता है कि इन शुभ रातों में की गई इबादत  औरका इबादत  का इनाम  83 वर्षों में की गई इबादत (पूजा) के इनाम  से अधिक होता है। इस्लामी विद्वान पवित्र पुस्तक में वर्णित सभी महत्वपूर्ण छंदों का अर्थ पढ़ते हैं।



इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, अंतिम विषम odd पांच रातों को लैलतुल क़द्र की रातें मानी जाती हैं और भारत में इस साल वे पाँच शुभ रातें 22 अप्रैल, 24, 26, 28 और 30 अप्रैल हैं। दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय शब-ए-क़द्र के दौरान एक विशेष दुआ पढ़ते हैं और वह है, 'अल्लाहुम्मा इन्नाका' अफुव्वुन तुहिबुल 'अफवा फा'फू 'अनी'। इसका अर्थ है , हे अल्लाह आप ही हैं जो बहुत क्षमा (माफ़) करते हैं और क्षमा करना पसंद करते हैं, इसलिए मुझे क्षमा करें।


एक दिलचस्प बात जान लीजिये इस रात के बारे में अल्लाह फरमाता है के तुम खुद इस रात को तलाश करो के कौनसी रात शब कदर की रात है, क्यूंकि ये रात 5 रातो में से किसी एक रात को ही आती है, अल्लाह के नबी फरमाते है तुम 5 रात जाग कर नमाज़ कुरान पढ़कर रहो क्यू के अगर 5 रात जाग कर तुम इबादत कर लिए तो तुम्हे वो के रात अपने आप मिल जाएगी और उस रात को मिलने वाला इनाम भी तुम्हे मिल जायेगा.


अल्लाह के नबी मुहम्मद साहब ने  बताया है के इस रात की सुबह का सूरज बहोत कम रौशनी से निकलता है और इस रात में मौसम भी अच्छा होता है जैसे न ज्यादा सर्द न ज्यादा गरम और कभी कभी हलकी बारिश भी होती है.


इसलिए आलिमे दिन कहते है इस रात को बाते करने खाने पिने घुमने फिरने में मत गुज़रो ये महिना और ये रात इबादत की और अल्लाह से अपनी दुआ मनवाने की रात है.